रोचक तथ्य
निशान लगे ताश के पत्ते: धोखाधड़ी का इतिहास




ताश के पत्तों पर निशान लगाना उतनी ही पुरानी बेईमानी है जितना यह खेल। स्पेन में इसके ऐतिहासिक तरीकों में टेढ़ा मोड़, नाखून का निशान और आईने की चाल शामिल थे। इन तरीकों से मोड़ों, नाखून के निशानों या रोशनी लौटाने वाले वार्निश के ज़रिए पत्ते पहचाने जा सकते थे। इनका ज़िक्र सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के साहित्य और अदालती अभिलेखों में मिलता है।
पुरानी चालें
- टेढ़ा मोड़: अहम पत्तों पर ऐसा मोड़ जो लगभग दिखाई ही न दे।
- नाखून का निशान: पत्ते के किनारे या पिछली तरफ़ नाखून से बनाया गया छोटा-सा निशान।
- आईने की चाल: ऐसा वार्निश जो अलग तरह से चमकता था, या ऐसा प्रतिबिंब जिससे प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देखे जा सकें।
- पहले से तैयार गड्डियाँ: घर के मालिक की मदद से सही गड्डी की जगह छेड़छाड़ की गई गड्डी रख देना।
खिलाड़ी अपना बचाव कैसे करते थे
नई गड्डी माँगकर, पत्ते बाँटने से पहले हमेशा गड्डी काटकर और अपनी ही गड्डी से खेलने की बहुत ज़िद करने वाले पर शक करके। इसी वजह से एक-एक करके पत्ते बाँटने जैसी परंपराएँ भी हैं।
आज का दौर
आज की गड्डियों के पत्तों के पीछे सममित आकृतियाँ होती हैं, जिनसे निशान लगाना मुश्किल हो जाता है। और लासकुआरेंता पर इंटरनेट के ज़रिए खेलते समय पत्ते सर्वर बाँटता है और आपके पत्ते कोई नहीं देखता। अगर इस विषय में आपकी दिलचस्पी है, तो छेड़छाड़ किए गए पासों और स्वर्ण युग के जुआरियों के बारे में भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
«आईने की चाल» क्या थी?
यह एक चाल थी जिसमें वार्निश या छोटे-से प्रतिबिंब का इस्तेमाल करके प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देखे जाते थे।
क्या इंटरनेट पर खेले जाने वाले खेल में बेईमानी हो सकती है?
लासकुआरेंता पर पत्ते सर्वर बाँटता है और कोई भी दूसरों के पत्ते नहीं देख सकता।