स्पेनिश इतिहास और अवकाश
स्पेन के स्वर्णयुग के जुआरी




सोलहवीं और सत्रहवीं सदी के स्पेन में माहिर जुआरी अपने हुनर और अक्सर धोखेबाज़ी के सहारे जुए के अड्डों में रोज़ी कमाते थे। उनकी अपनी शब्दावली और तरकीबें थीं, और सेर्वान्तेस, केवेदो तथा मातेओ अलेमान जैसे लेखकों की रचनाओं में उनके चित्र मिलते हैं।
एक दुनिया, जिसके अपने नियम थे
वे जुए के अड्डों, सरायों और राह किनारे की सरायों में आया-जाया करते थे। कुछ टोली बनाकर काम करते थे: एक खेलता, दूसरा ध्यान भटकाता और तीसरा प्रतिद्वंद्वी के पत्ते देखता। उन्हें पेशेवर ठग, जुए के अड्डेबाज़, हाथ की सफ़ाई दिखाने वाले... जैसे नामों से पुकारा जाता था। हर नाम का अपना अलग अर्थ था।
उनकी चालें
अच्छे पत्तों के कोने हल्के से मोड़ देना, नाखून से उन पर निशान लगाना, रोशनी में चमकने वाला वार्निश इस्तेमाल करना या गड्डी को पहले से तैयार की गई दूसरी गड्डी से बदल देना। इन तरकीबों के बारे में हमने निशान लगे पत्ते: इतिहास में धोखेबाज़ी की तरकीबें में बताया है।
किताबों में उनकी झलक
सेर्वान्तेस ने रिनकोनेते और कोर्तादियो में उनका बड़ा मज़ेदार चित्र खींचा है, जिसमें दो लड़के ताश के खेल में अपने हुनर की डींगें मारते हैं। इसकी चर्चा हमने सेर्वान्तेस की रचनाओं में आने वाले ताश के खेल में की है। उस दौर के समूचे माहौल को समझने के लिए स्वर्णयुग में मनोरंजन भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माहिर जुआरी किसे कहते थे?
ऐसे व्यक्ति को जो ताश खेलने में बहुत कुशल हो और अक्सर धोखेबाज़ी का भी शौक रखता हो।
पेशेवर ठग किसे कहते थे?
खेल में पेशेवर तौर पर धोखेबाज़ी करने वाले को। स्वर्णयुग में यह शब्द खूब इस्तेमाल होता था।